rajan kumar jha
Tuesday, 22 March 2011
समस
उम्मीदों की शमा दिल में मत जलना ,
इस जहाँ से अलग दुनिया मत बसना ,
आज बस मूड में था तो समस कर दिया ,
पर रोज इंतज़ार में पलके मत बिछाना !
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